हनुमान चालीसा
दोहा : श्रीगुरु…
चालीसा से जुड़ी सभी रचनाएँ — 8 रचनाएँ उपलब्ध हैं।
दोहा : श्रीगुरु…
॥दोहा॥ मातु लक्ष्मी करि कृपा, करो हृदय में वास। मनोकामना सिद्ध करि, परुवहु मेरी आस॥ ॥सोरठा॥ यही मोर…
॥चौपाई॥ श्री रघुबीर भक्त हितकारी। सुनि लीजै प्रभु अरज हमारी॥ निशि दिन ध्यान धरै जो कोई। ता सम…
॥चौपाई॥ नमो नमो दुर्गे सुख करनी। नमो नमो अम्बे दुःख हरनी॥ निराकार है ज्योति तुम्हारी। तिहूँ लोक फैली…
जय गणपति सदगुण सदन, कविवर बदन कृपाल।विघ्न हरण मंगल करण, जय जय गिरिजालाल॥ जय जय जय गणपति गणराजू।मंगल…
॥दोहा॥ बंशी शोभित कर मधुर, नील जलद तन श्याम।…
जय गणेश गिरिजासुवन मंगल मूल सुजान ।कहत अयोध्यादास तुम देउ अभय वरदान ॥जय गिरिजा पति दीन दयाला ।सदा…
॥दोहा॥ जय जय तुलसी भगवती सत्यवती सुखदानी। नमो नमो हरि प्रेयसी श्री वृन्दा गुन खानी॥ श्री हरि शीश…