पहला अध्याय
महामुनि ऋषि व्यास जी ने कहा- बहुत समय पहले नैमिषारण्य तीर्थ में शौनकादिक अट्ठासी हजार ऋषियों ने पुराणवेत्ता श्री सूतजी से पूछा- हे सूतजी!…
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