श्रृंगार कर ले री सजनि!
श्रृंगार कर ले री सजनि!नव क्षीरनिधि की उर्म्मियों सेरजत झीने मेघ सित,मृदु फेनमय मुक्तावली सेतैरते तारक अमित;सखि! सिहर…
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श्रृंगार कर ले री सजनि!नव क्षीरनिधि की उर्म्मियों सेरजत झीने मेघ सित,मृदु फेनमय मुक्तावली सेतैरते तारक अमित;सखि! सिहर…
आज क्यों तेरी वीणा मौन? शिथिल शिथिल तन थकित हुए कर,स्पन्दन भी भूला जाता उर, मधुर कसक सा…
तुम्हें बाँध पाती सपने में!तो चिरजीवन-प्यास बुझालेती उस छोटे क्षण अपने में! पावस-घन सी उमड़ बिखरती,शरद-दिशा सी नीरव…
पुलक पुलक उर, सिहर सिहर तन,आज नयन आते क्यों भर-भर! सकुच सलज खिलती शेफाली,अलस मौलश्री डाली डाली;बुनते नव…
धीरे धीरे उतर क्षितिज सेआ वसन्त-रजनी! तारकमय नव वेणीबन्धनशीश-फूल कर शशि का नूतन,रश्मि-वलय सित घन-अवगुण्ठन, मुक्ताहल अभिराम बिछा…
प्रिय इन नयनों का अश्रु-नीर!दुख से आविल सुख से पंकिल,बुदबुद् से स्वप्नों से फेनिल,बहता है युग-युग अधीर! जीवन-पथ…