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नीहार

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6 रचनाएँ
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नीहार 28 May 2025

संसार

निश्वासों का नीड़, निशा काबन जाता जब शयनागार,लुट जाते अभिराम छिन्नमुक्तावलियों के बन्दनवार, तब बुझते तारों के नीरव…

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नीहार 22 May 2025

विसर्जन

निशा की, धो देता राकेशचाँदनी में जब अलकें खोल,कली से कहता था मधुमासबता दो मधुमदिरा का मोल; बिछाती…

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नीहार 22 May 2025

मिलन

रजतकरों की मृदुल तूलिकासे ले तुहिन-बिन्दु सुकुमार,कलियों पर जब आँक रहा थाकरूण कथा अपनी संसार; तरल हृदय की…

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नीहार 28 May 2025

मिटने का खेल

मैं अनन्त पथ में लिखती जोसस्मित सपनों की बातें,उनको कभी न धो पायेंगीअपने आँसू से रातें! उड़ उड़…

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नीहार 6 Aug 2015

अधिकार

वे मुस्काते फूल, नहीं जिनको आता है मुर्झाना, वे तारों के दीप, नहीं जिनको भाता है बुझ जाना;…

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नीहार 26 May 2025

अतिथि से 

बनबाला के गीतों सानिर्जन में बिखरा है मधुमास,इन कुंजों में खोज रहा हैसूना कोना मन्द बतास। नीरव नभ…

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