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मैथिली शरण गुप्त

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9 रचनाएँ
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मैथिली शरण गुप्त 22 May 2025

 बन्धन

सखे, मेरे बन्धन मत खोल, आप बँधा हूँ आप खुलूँ मैं, तू न बीच में बोल। जूझूँगा, जीवन…

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मैथिली शरण गुप्त 22 May 2025

 चेतना

अरे भारत! उठ, आँखें खोल, उड़कर यंत्रों से, खगोल में घूम रहा भूगोल! अवसर तेरे लिए खड़ा है,…

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मैथिली शरण गुप्त 22 May 2025

मनुष्यता 

विचार लो कि मर्त्य हो न मृत्यु से डरो कभी¸ मरो परन्तु यों मरो कि याद जो करे…

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मैथिली शरण गुप्त 22 May 2025

मातृभूमि

नीलांबर परिधान हरित तट पर सुन्दर है। सूर्य-चन्द्र युग मुकुट, मेखला रत्नाकर है॥ नदियाँ प्रेम प्रवाह, फूल तारे…

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मैथिली शरण गुप्त 22 May 2025

 भारतवर्ष

मस्तक ऊँचा हुआ मही का, धन्य हिमालय का उत्कर्ष। हरि का क्रीड़ा-क्षेत्र हमारा, भूमि-भाग्य-सा भारतवर्ष॥ हरा-भरा यह देश…

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मैथिली शरण गुप्त 3 Mar 2018

मैथिलीशरण गुप्त

मैथिलीशरण गुप्त का जन्म ३ अगस्त १८८६ में पिता सेठ रामचरण कनक ने और माता कौशिल्या बाई की…

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मैथिली शरण गुप्त 6 Aug 2015

किसान

हेमन्त में बहुदा घनों से पूर्ण रहता व्योम है पावस निशाओं में तथा हँसता शरद का सोम है…

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मैथिली शरण गुप्त 6 Aug 2015

पंचवटी / पृष्ठ १

पूज्य पिता के सहज सत्य पर, वार सुधाम, धरा, धन को, चले राम, सीता भी उनके, पीछे चलीं…

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मैथिली शरण गुप्त 6 Aug 2015

नहुष

‘‘नारायण ! नारायण ! साधु नर-साधना, इन्द्र-पद ने भी की उसी की शुभाराधना।’’ गूँज उठी नारद की वीणा स्वर-ग्राम में,…

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