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रामधारी सिंह दिनकर

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5 रचनाएँ
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रामधारी सिंह दिनकर 7 Oct 2019

भारत का यह रेशमी नगर

दिल्ली फूलों में बसी, ओस-कण से भीगी, दिल्ली सुहाग है, सुषमा है, रंगीनी है, प्रेमिका-कंठ में पड़ी मालती…

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रामधारी सिंह दिनकर 7 Oct 2019

दिल्ली (कविता)

यह कैसी चांदनी अम के मलिन तमिर की इस गगन में, कूक रही क्यों नियति व्यंग से इस…

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रामधारी सिंह दिनकर 23 Feb 2018

जनतंत्र का जन्म

सदियों की ठंढी-बुझी राख सुगबुगा उठी, मिट्टी सोने का ताज पहन इठलाती है; दो राह, समय के रथ…

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