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जय शंकर प्रसाद

दो बूँदें

7 Jun 2018 · 1 मिनट पठन · COMPANY MITRA

शरद का सुंदर नीलाकाश

निशा निखरी, था निर्मल हास

बह रही छाया पथ में स्वच्छ

सुधा सरिता लेती उच्छ्वास

पुलक कर लगी देखने धरा

प्रकृति भी सकी न आँखें मूंद

सु शीतलकारी शशि आया

सुधा की मनो बड़ी सी बूँद !

– जयशंकर प्रसाद

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