आराधना
जब मैं आँगन में पहुँची, पूजा का थाल सजाए। शिवजी की तरह दिखेवे, बैठे थे ध्यान लगाए॥ जिन…
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सुभद्रा कुमारी चौहान से जुड़ी सभी रचनाएँ — 6 रचनाएँ उपलब्ध हैं।
जब मैं आँगन में पहुँची, पूजा का थाल सजाए। शिवजी की तरह दिखेवे, बैठे थे ध्यान लगाए॥ जिन…
बहिन आज फूली समाती न मन में। तड़ित आज फूली समाती न घन में।। घटा है न झूली…
दिन में प्रचंडरवि-किरणें मुझको शीतल कर जातीं। परम धुरज्योत्स्ना तेरी, हे शशि! है मुझे जलाती॥ संध्या की सुमधुर…
सूखी सी अधखिली कली है परिमल नहीं, पराग नहीं। किंतु कुटिल भौंरों के चुंबन का है इन पर…
उनका जन्म नागपंचमी के दिन इलाहाबाद के निकट निहालपुर नामक गांव में रामनाथसिंह के जमींदार परिवार में हुआ था। बाल्यकाल से ही…
सब दुखहरन सुखकर परम हे नीम! जब देखूँ तुझे। तुहि जानकर अति लाभकारी हर्ष होता है मुझे॥ ये…