हिन्दी कविताएँ, कहानी,जीवन परिचय,व्रत कथाएँ , भजन ,आरती, चालीसा,लोक गीत,चुटकुलेऔर प्रेरक विचार
सूर्यकांत निराला

बापू, तुम मुर्गी खाते यदि…

12 Aug 2015 · 1 मिनट पठन · COMPANY MITRA

बापू, तुम मुर्गी खाते यदि
तो क्या भजते होते तुमको
ऐरे-ग़ैरे नत्थू खैरे – ?
सर के बल खड़े हुए होते
हिंदी के इतने लेखक-कवि?

बापू, तुम मुर्गी खाते यदि
तो लोकमान्य से क्या तुमने
लोहा भी कभी लिया होता?
दक्खिन में हिंदी चलवाकर
लखते हिंदुस्तानी की छवि,
बापू, तुम मुर्गी खाते यदि?

बापू, तुम मुर्गी खाते यदि
तो क्या अवतार हुए होते
कुल के कुल कायथ बनियों के?
दुनिया के सबसे बड़े पुरुष
आदम, भेड़ों के होते भी!
बापू, तुम मुर्गी खाते यदि?

बापू, तुम मुर्गी खाते यदि
तो क्या पटेल, राजन, टंडन,
गोपालाचारी भी भजते- ?

भजता होता तुमको मैं औ´
मेरी प्यारी अल्लारक्खी !

बापू, तुम मुर्गी खाते यदि !

( सूर्यकांत त्रिपाठी “निराला”)

साझा करें:

Leave a Reply

Discover more from हिंदी संग्रह

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading