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कहानी

कौवा और नाग

22 Aug 2015 · 1 मिनट पठन · COMPANY MITRA

एक बार की बात है एक पेड़ की चोटी पर एक घोंसला था जिस मेँ एक कौवे की एक जोड़ी रहती थी। लेकिन दुर्भाग्य से उस पेड़ के तल पर एक नाग भी रहता था। जब भी मादा कौवा कोई अन्डा देतीं और जैसे ही कौवे की जोड़ी पेड़ से दूर जाते तभी वो नाग रंगता हुआ पेड़ के ऊपर जाता और घोंसले में रखा कौवे का अंडा खा जाता। जब कौवे की जोड़ी वापस आए तो यह देख बहुत दुखी हुए और जब यह बार-बार हुआ तब कौवे की जोड़ी ने उस नाग से छुटकारा पाने का निर्णय कर लिया।

कौवे ने अपने मित्र् सियार से संपर्क किया और उसको सारी बात बताई।  सियार कौवे से बोला की तुम राजा के महल जाओ और वहां से एक महँगी वस्तु लाने और उसे नाग के बिल फेंकने के लिए कहा । कौवे राजा के महल गया और उसने रानी के कमरे से उसका हार चुरा लिया। रानी ने यह देख लिया और महल की रक्षक को कौवे से वो हार वापस लेन के लिए कहा।  रक्षक कौवे के पीछे-पीछे जंगल की ओर गया। कौआ जब पेड़ के पास पंहूचा तब उसने रानी का हार नाग के बिल में फेंक दिया। रक्षक ने यह देखा लिया और उस बिल से हार वापस लेने के लिए रक्षक ने बिल में रहने वाले नाग को मर दिया और बिल से हार वापस ले लिया।

इस तरह से कौवे की जोड़ी नाग से छुटकारा पाने में सफल रही।

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