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आरती

अहोई माता आरती

3 Nov 2015 · 1 मिनट पठन · COMPANY MITRA

जय अहोई माता जय अहोई माता
तुमको निसदिन ध्यावत हरी विष्णु धाता

ब्रम्हाणी रुद्राणी कमला तू ही है जग दाता
जो कोई तुमको ध्यावत नित मंगल पाता

तू ही है पाताल बसंती तू ही है सुख दाता
कर्म प्रभाव प्रकाशक जगनिधि से त्राता

जिस घर थारो वास वही में गुण आता
कर न सके सोई कर ले मन नहीं घबराता

तुम बिन सुख न होवे पुत्र न कोई पता
खान पान का वैभव तुम बिन नहीं आता

शुभ गुण सुन्दर युक्ता क्षीर निधि जाता
रतन चतुर्दश तोंकू कोई नहीं पाता

श्री अहोई माँ की आरती जो कोई गाता
उर उमंग अति उपजे पाप उतर जाता

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