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आरती

बुधवार आरती

7 May 2025 · 1 मिनट पठन · guptadivya513

आरती युगलकिशोर की कीजै. तन मन धन न्यौछावर कीजै..

गौरश्याम मुख निरखत रीजै. हरि का स्वरुप नयन भरि पीजै..

रवि शशि कोट बदन की शोभा. ताहि निरखि मेरो मन लोभा..

ओढ़े नील पीत पट सारी. कुंजबिहारी गिरवरधारी..

फूलन की सेज फूलन की माला. रत्न सिंहासन बैठे नन्दलाला..

कंचनथार कपूर की बाती. हरि आए निर्मल भई छाती..

श्री पुरुषोत्तम गिरिवरधारी. आरती करें सकल ब्रज नारी..

नन्दनन्दन बृजभान, किशोरी.  परमानन्द स्वामी अविचल जोरी ..

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