हिन्दी कविताएँ, कहानी,जीवन परिचय,व्रत कथाएँ , भजन ,आरती, चालीसा,लोक गीत,चुटकुलेऔर प्रेरक विचार
सोहर गीत

जन्मे अवध रघुरइया हो

18 May 2025 · 1 मिनट पठन · guptadivya513

जन्मे अवध रघुरइया हो, सब मंगल मनावो

रूप मे अनूप चारो भइया हो,

सब मंगल मनावो….

एक श्याम जो नील कमल हो

या जमुना का निर्मल जल हो

दूजे की है चांद सी गोरइया हो

सब मंगल मनावो …..

जन्मे अवध रघुरइया हो, सब मंगल मनावो

बरसे सुमन सब देवगण आये

दरसन का सब लाभ उठाये

देत सब  राजा को बधइया हो

सब मंगल मनावो ….

जन्मे अवध रघुरइया हो, सब मंगल मनावो

जल गये दीपक मनी दिवाली

मंत्री करे खजाना खाली

राही बांटे कामधेनु गइयाँ हो

सब मंगल मनावो …..

जन्मे अवध रघुरइया हो, सब मंगल मनावो

जन्मे अवध रघुरइया हो, सब मंगल मनावो

साझा करें:

Leave a Reply

Discover more from हिंदी संग्रह

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading