जागरण
सज गया दक्षिणा का देखो वह महत यान,सब जाग उठे हैं अमृत पुत्र भी कान्तिमान ! आर्या अरुणा…
पढ़ें →
1 मिनट
सप्तपर्णा से जुड़ी सभी रचनाएँ — 3 रचनाएँ उपलब्ध हैं।
सज गया दक्षिणा का देखो वह महत यान,सब जाग उठे हैं अमृत पुत्र भी कान्तिमान ! आर्या अरुणा…
आ रही उषा ज्योति:स्मित !प्रज्जवलित अग्नि है लहराती आभा सित । सब द्विपद चतुष्पद प्राणि जगत है चंचल,सविता…
दिवजाता शुभ्राम्बर-विलसित,नूतन, आभा से उद्भासित,भू-सुषमा की एक स्वामिनीशोभन आलोकित विहान दे । अरुण किरण के वाजि चन्द्र-रथ-ले करती…